सप्तम राहु वैश्याओं से प्रीति देता है

By astrobhadauria4

राहु करन्ट देता है,सप्तम स्थान मे जाकर जननांग को उत्तेजित करता है,अक्सर इस राहु वाले लोगों का हाथ अचानक अपने जननांग पर जाता रहता है,जो स्त्रियां इस राहु के घेरे में होती है,उन्हे भी इस प्रकार के लोगों की तलाश रहती है,उनके लिये तो पुरुष का बदलना उसी प्रकार से है,जैसे कि कोई वाहन बदलता है,नीचे लिखी कहानी का प्रारूप भी सप्तम राहु का ही है,कामुकता की बीमारी के कारण पुरुष और स्त्री का मन इससे दूर नही हो पाता है,और वे इस राहु के कारण अपने जीवन को बचा नही पाते है,अगर किसी प्रकार से मंगल या गुरु का प्रभाव इस राहु पर है,तो जीवन सुरक्षित रह जाता है,अन्यथा नही.

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2 Responses to “सप्तम राहु वैश्याओं से प्रीति देता है”

  1. Manish Says:

    aapki jankari bahut acchi lagi. is tarah ki jankari ko vistrat rup me de to bahut gyan badega

  2. astrobhadauria4 Says:

    ज्योतिष का ज्ञान एक सीमा में नही है,शरीर के अन्दर सभी भाव और ग्रह है,तो संसार की प्रत्येक वस्तु में वे अपना आस्तित्व रखते है,अधिक जानकारी आपको ज्योतिष के मामले में http://www.astrobhadauria.wikidot.com पर भी खूब सारी मिल सकती है,मुझे जो भी नया समझ में आता है,मै लिख कर संसार के हवाले कर देता हूँ,कारण हर क्रिया का निर्णायक का काम संसार ही करता है,व्यक्ति खुद अपने काम का निर्णायक नही हो सकता है,नर में नारायण है,तो निर्णायक तो नर ही होगा,इसी लेकिये श्रीकृष्ण भगवान ने गीता में कहा है,”कर्म करो और फ़ल ईश्वर पर छोड दो”.

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