केतु की सिफ़्त सहायक के लिये मानी जाती है,कर्क राशि माता,मन और मकान के साथ पानी वाला स्थान तथा जन्म के बाद माता की गोद से लेकर अंतिम समय में आखिरी उस जमीन के टुकडे से वास्ता रखती है,जहां पर प्रयाण के बाद शरीर की मिट्टी को जलाया या दफ़नाया जाता है,केतु का स्थान परिवर्तन सरकारी स्थान से जनता के घर में हुआ है,नेता और सहायकों का जमघट जनता के बीच मिलना चालू हो जाता है,जिन्होंने कभी जनता के बीच जाकर अपनी शक्ल नही दिखाई उन्हे भी जनता के बीच जाने का अवसर यह केतु देता है,और जो भी जनता के बीच नही जाना चाहते है,उन्हे भी बिना जनता के बीच जाये अपना वर्चस्व कायम रखना बेकार की बात ही मानी जायेगी,केतु के ठीक एक सौ अस्सी डिग्री पर राहु की स्थिति होती है,राहु की सिफ़्त दो लोगों को भिडाकर दूर बैठ कर तमाशा देखने वाली होती है,केतु का स्वभाव अंग्रेजों के स्वभाव से मिलता है,और राहु का स्वभाव मुस्लिम समुदाय से मिलता है,मुस्लिम समुदाय का राज्य के घर में आना और केतु का जनता में आना धर्म परिवर्तन की तरफ़ भी इशारा करता है,जबतक गुरु बक्री है,तब तक केतु अपना काम करने के लिये स्वतंत्र है,वह किसी भी बात से अपने को समाज में फ़ैलाकर अपना काम कर सकता है,और मुस्लिम समुदाय का मुखिया अपने को राजनीति के अन्दर लाकर जनता में हुकूमत करने के लिये तैयार खडा है,भारत की जनता के लिये एक बदलाव का समय सामने है,जो लोग अभी तक जातिगत राजनीति से संक्रमित होकर राज्य करते आये है,उन्हे फ़िर से अपना व्यक्तित्व बदलने की जरूर होगी,और इस एक साल के समय में काफ़ी कुछ झेलने के लिये मजबूर होना पडेगा,राहु का रूप दलित मुखिया के रूप में माना जाता है,वह ताबड तोड बार करने के बाद अपना पहला रूप कार्य के प्रति और दूसरा रूप राज्य को गिराने तक अपना काम करता है,इस केतु के कर्क में आने के बाद केतु जनता में धर्म के प्रति फ़ैली बुराइयों को समाप्त करने के प्रति अपना रवैया कायम भी रखने के लिये राहु का सहारा लेता है,तिब्बतियों पर जुल्म और चीन के रवैये के प्रति सभी को तभी समझ में आजाता है,कि चीन ने धर्म को आहत किया,और धार्मिक लोगों पर जुल्म करने के बाद लाठियां बरसायीं,जनता के अन्दर कोई प्रतिक्रिया नही हुई लेकिन गुरु का चेला केतु चुप नही रहा,उसने राहु का सहारा लिया और अचानक चीन में भूकम्प देकर दस हजार लोगों की मौत देकर बदला ले लिया,मौत भी सिर्फ़ केतु ने अपनी पहिचान को ही दी,केतु की पहिचान में वे स्कूली बच्चे मरे जिनकी मौत सुनकर जनमानस का ह्रदय चीत्कार कर उठा. केतु अपना बलिदान देकर मालिक की रक्षा करता है,केतु की सिफ़्त कुत्ते के द्वारा भी नापी जाती है,कुत्ता जो दरवेश के रूप में सामने होता है,जो मिले केवल पेट भरने से ही काम होता है,कभी उदारता के अलावा और कुछ समझ में ही नही आता है,और जब पागल का रूप होता है तो जिसे भी डसता है,वह पानी को देखकर भौंकने लगता है,और कहने लगता है,कि मैने भी केतु को आहत किया था,इसलिये उसके द्वारा बदला लेने के कारण उसी की मौत मर रहा हूँ.केतु की एक पहिचान और बताई जाती है,कि कर्क राशि के अन्दर वह पानी के अन्दर खडा हुआ खम्भा माना जाता है,और गुरु के बक्री होने के साथ जहां भी देखा जायेगा,पानी की अतिवृष्टि के कारण कितने ही मकान पानी के अन्दर खडे होकर अपना हाल बताने के लिये मजबूर हो जायेंगे,कि देखिये हम भी केतु के कारण पानी के अन्दर अपना वर्चस्व कायम नही रख पाये,केतु खुद को आहत करने के बाद मालिक की रक्षा करता है,केतु परिवार में सदस्य के रूप में भी अपना स्थान कायम रखता है,जैसे बहिन के घर भाई कुत्ता,ससुराल में जंवाई कुत्ता,और मामा के घर भान्जा कुत्ता,यानी हां में हां मिलाने पर सब ठीक है,वरना लोगों के द्वारा दुत्कारने का मजा भी यह तीनों केतु आसानी से समझते होंगे.
Archive for May, 2008
केतु और कर्क राशि
May 13, 2008सप्तम राहु वैश्याओं से प्रीति देता है
May 6, 2008राहु करन्ट देता है,सप्तम स्थान मे जाकर जननांग को उत्तेजित करता है,अक्सर इस राहु वाले लोगों का हाथ अचानक अपने जननांग पर जाता रहता है,जो स्त्रियां इस राहु के घेरे में होती है,उन्हे भी इस प्रकार के लोगों की तलाश रहती है,उनके लिये तो पुरुष का बदलना उसी प्रकार से है,जैसे कि कोई वाहन बदलता है,नीचे लिखी कहानी का प्रारूप भी सप्तम राहु का ही है,कामुकता की बीमारी के कारण पुरुष और स्त्री का मन इससे दूर नही हो पाता है,और वे इस राहु के कारण अपने जीवन को बचा नही पाते है,अगर किसी प्रकार से मंगल या गुरु का प्रभाव इस राहु पर है,तो जीवन सुरक्षित रह जाता है,अन्यथा नही.
घर के लडका मठा को तरसें
May 6, 2008जमाना बदल गया है,किसी को अपनी फ़िकर नही जितनी कि दूसरों की रहती है,माता पिता ने बडे अरमानों के साथ शादी की सम्बन्ध स्थापित किया,लेकिन बेटाजी का ध्यान केवल चमक दमक के चक्कर में रांडबाजी में फ़ंस गया,रांड ने डोरे डाले और अपनी धाक जमा बैठी,एक घर में आकर बैठ गयी,दो लडके रांड के और दो पत्नी से चार का खर्चा,दो पत्नियां,जो रानी थीं वो तो बांदी बन गयी और जो बांदी थीं वे रानी बन बैठी,सुबह सुबह से ही हुकुम चलाना,और गप्पे मारना,कुछ इधर की और कुछ उधर की बातें करना,जो कुछ भी लडके के द्वारा कमा कर लाया जाना उसे अपने ऊपर और अपने लडकों पर वह रांड खर्च कर लेती,अच्छी चीजें खुद के लडकों को खिला देती बचा खुचा उन बेचारों को मिल पाता,पेट नही भर पाता तो वे पहले वाली के बच्चे पडौस के घरों की तरफ़ जाने लगे,कोई कुछ दे देता कोई कुछ समय निकलने लगा,दो पत्नी और चार बच्चे संभालना तो भारी पडता ही है,इधर खर्चे की मार उधर दिमागी परेशानी,क्या किया जाय,मजा की सजा है,शरीर भी कमजोर होता जा रहा था,दिमाग के अन्दर परेशानी आने लगी थी,खर्चो की मार पडने लगी थी,अक्सर अपनी थाली का भोजन कम ही स्वादिष्ट लगता है,दूसरों की थाली में घी अधिक दिखाई देता है,अपनी पत्नी और बच्चे तो अपने ही है,पराये बच्चे जब एक दम पापा कहने लगें और पराई स्त्री जरा ध्यान रखना चालू कर दे,तो घर वाली की आफ़त आ ही जाती है,अपने बच्चे दिमाग से कमजोर दिखाई देते है,लेकिन रांड के बच्चे इसलिये दिमाग से तेज दिखाई देते है,कि वे अपना काम निकालने के लिये कुछ भी सेवा कर सकते है,रात को रांड की सेज सजती है,पत्नी रात भर करवट बदल बदल कर निकालती है,मानसिक चिन्ता के चलते उसका शरीर भी सूखता जा रहा है,दिमाग भी चिढ चिढा होता जा रहा है,घर में कलह बढती जा रही है,एक दिन वही होता है,जो होना था,पत्नी अपने बच्चों को लेकर मायके चली जाती है,और पारिवारिक न्यायालय में मुकद्दमा ठोक देती है,कि उसके बच्चों और उसके लिये अदालत पति से खर्चा दिलवाये,पति देव को नोटिस आता है,अभी तक तो मानसिक तनाव था,अब शारीरिक तनाव भी बढ गया,पति देव भी सामने से जाकर जूझने लगे,वकील और अदालत की लडाई चालू हो गयी,इधर जिन बच्चों का भाग्य बनना था,उस जगह पर वे ननिहाल की रोटियों पर निर्भर है,ननिहाल भी कितने दिन खाना देती है,अदालती मामलों का खर्चा और जीवन निर्वाह के लिये साधन ननिहाल वाले भी तंग है,आखिर में पत्नी ने जाकर एक प्राइवेट कम्पनी में कपडे की सिलाई करने का काम कर लिया,इधर बच्चों ने अपने लिये ढाबे पर काम खोज लिया,पत्नी मुकद्दमा भी लडती बच्चों को खाना बनाना और उनका बाकी का काम भी करती,जीवन में कुछ सुधार आने लगा,उधर बाबूजी का बुरा हाल था,दिन रात मेहनत करते,अपने बचाव के लिये बकील दर बकील बदले जा रहे थे,इधर रांड के साथ रात को मीटिंग होती,कि पहले वाली पत्नी का क्या किया जाये,इन्सान के अन्दर भी जानवरी वृत्ति देखी जाती है,जब उसे कोई बचाव नही दिखाई देता है,तो वह हिंसा पर उतर आता है,वही उन बाबूजी ने किया,पता तो था ही कि पहले वाली पत्नी कहां पर किराये से रहती है,रात को उस रांड के एक दो साथियों को लेकर गये,और पत्नी का बच्चों के साथ काम तमाम करने की कोशिश की,भगवान का आशीर्वाद,सभी बच गये,पडौसियों ने उन सभी को लेकर पास के थाने में बंद करवा दिया,पुलिस को पूरा माजरा समझ में आ गया,उसने अदालत में हाजिर किया,और बाबूजी जेल में,इधर रांड को जो कमाई मिलती थी,उसमे एक दम कमी आगयी,उसके बच्चे भी सडक पर आगये,अब क्या किया जाये,उसकी तो आदत थी,फ़िर से किसी नये मुर्गे की तलास चालू हो गयी,और एक दिन जो भी घर का सामान था सभी ओने पोने दामों में ठिकाने लगाकर नये मुर्गे के साथ अपने बच्चों को लेकर चली गयी,बाबूजी जब जेल से बाहर आये,तो घर खाली मिला,रांड का पता चला कि वहा किसी अन्जानी जगह पर अपने बच्चे लेकर चली गयी है,पछतावे के लिये अब क्या किया जाये,एक ही बात समझ में आयी कि जो गल्ती की है,उसके लिये पत्नी से क्षमा मांगी जाये,पत्नी के पास गये,खूब रोये धोये लेकिन वह तो पसीज गयी,बच्चे जो अभी तक जमाने की हवा देख चुके थे,मां का दर्द देख चुके थे,उन्होने साफ़ मना कर दिया,कि पता नही कब किस जगह पर इस प्रकार का बाप ठिकाने लगा दे,अब दुनिया के किसी कौने में अपनी जगह नही दिखी तो आवारा बन कर निकल लिये,शरीर में दम नही रही थी,कोर्ट केश भी चल रहे थे,धीरे धीरे अचल सम्पत्ति भी ठिकाने लग गयी,कुछ बकील खा गये कुछ थानेदार और बिचौलिये खा गये,एक दिन उनका पता नही चला कि वे कहां गये,थाने से वारंट निकल गया,बकीलों ने मुकद्दमा हरवा दिया,अदालत ने फ़ैसला दे दिया कि पत्नी मुकद्दमा जीत गयी है,उसे हर्जा खर्चा दिया जाये,बाबूजी लापता है,पत्नी को इन्तजार है कि कभी तो वापस आयेंगे,साल दर साल निकल गये,बच्चे शादी शुदा हो गये,उन्होने अपने अपने प्रयास से अपना अपना घर बना लिया,पत्नी को कभी एक तो कभी दूसरा अपने साथ रखने लगा,जीवन चलने लगा.
उपरोक्त्त कारण को केवल एक ही बात से सुधारा जा सकता था,पत्नी के घर वाले किसी प्रकार से साम दाम दंड भेद से उस रांड को घर से निकाल देते तो बाबूजी का जीवन बच जाता.घाटा सिर्फ़ बाबूजी का ही हुआ,अपराध बाबूजी ने किया था,बाकी के तो साधन थे,अपने अपने स्थान पर चले गये.