पारिवारिक न्यायालय में जाने का मतलब शारीरिक कमजोरी !
आजकल बच्चे पैदा करने के लिये कोई समझ का काम नही करता है,जभी कामुकता का उदय हुआ,और पत्नी पति के साथ,पति पत्नी के साथ अपना सम्बन्ध बना लेता है,एक दूसरे को परास्त करने के बाद जब शरीर का पिछला कमाया हुआ धन वीर्य या रज स्खलित हो जाता है,तो पत्नी का गर्भवती हो जाना लाजिमी होता है,नौ महिने और दस दिन के बाद बच्चा पैदा हो जाता है,उस बच्चे का ख्याल केवल माता के प्रति ही रहता है,पिता का काम तो लोकाचार और दया भाव के चलते अपने को और ऊंचा दिखाने के चक्कर में बच्चे का पालन पोषण करना होता है,वह जमाना चला गया जब बच्चे के प्रति संस्कार डाले जाते थे,आज तो बच्चे के अन्दर वही संस्कार डाले जा रहे है,कि वह किस प्रकार से अधिक से अधिक चालाक बन कर लोगों से अधिक धन कमाने की मशीन बने,और जब वह धन कमाने की मशीन बन जाता है,तो उससे अलग अलग कारणों को पैदा करने के बाद धन की मांग की जाती है,जब तक वह अपने भाव में नही रहता धन को माता पिता को देता रहता है,और जैसे ही उसकी पत्नी को पता चलता है,कि उसका पति अपनी कमाई का हिस्सा अपने माता पिता को दे रहा है,वह अपने त्रिया चरित्र के चलते पति को इतना मजबूर कर देती है,कि पति के सामने से अपने ही खर्चे पूरे नही हो पाते है,वह अपने माता पिता को क्या दे,माता का खिंचाव बच्चे के प्रति रहता है,वह चाहती है कि बच्चा उसी प्रकार से व्यवहार करे जिस प्रकार से वह पहले करता था,और जिस प्रकार से पहले वह माता के हाथ का ही खाना खाया करता था,और किसी भी आफ़त के आने के कारण सबसे पहले अपनी माता को ही पुकारा करता था,पत्नी के आते ही माता का स्वभाव अपने अनुसार चलाने का होता है,लेकिन पत्नी भी उससे तीस साल कम से कम छोटी होती है,इस तीस साल का जनरेशन गेप साधारण सी गति से चलने वाली जिन्दगी पर आजाती है,घर में तनाव होता है,और झगडे बढ जाते है,झगडे बढने का कारण जो मुख्य होता है,वह समझदार ही जान पाते है,जब बच्चे की शादी हो जाती है,और बच्चा और बच्ची आज के मीडिया के अनुसार अपने को हीरो और हीरोइन समझने लगते है,तथा रात को अपनी मर्जी से सेक्स के प्रति उन्मुख होते है,तो मध्यम परिवारों में जितना खाना मिलता है,सभी को पता है,आदमी रात को एक बार ही खाना सही तरीके से खा पाता है,पूरा दिन चाय और अन्य खानों पर चलते है,भूख लगने पर बाजार का पीजा या डबल रोटी पर ही पूरा दिन निकालना पडता है,जवानी के नशे में और अधिक से अधिक मजा लेने के चक्कर में पति पत्नी यह भी भूल जाते है,कि उनके अन्दर वीर्य या रज का भन्डार तो भरा नही है,जो लगातार चलता रहेगा,रोजाना के नये नये सेक्स के तरीके और ब्लू फ़िल्मों को देख कर सेक्स का नया नया तरीका करने के बाद शरीर की ताकत खत्म हो जाती है,इधन सवेरा होते ही काम पर जाना पडता है,और माताजी भी अपने को फ़्री समझ कर घर का पूरा काम नई बहू पर डाल देती है,नई बहू के अन्दर रात की कामक्रीडा के बाद इतनी भी तथा नही रहती है,कि सवेरे की कोई कथा की जाये,वह बिस्तर से लेट उठ पाती है,शरीर की कमजोरी और थकावट से शरीर का जर्रा जर्रा दर्द कर रहा होता है,माताजी को लगता है,कि बहू काम नही करना चाहती है,घर के अन्दर चिक चिक चालू होती है,बहू झल्लाहट के मारे अपने पीहर फ़ोन करती है,और पीहर वालों को लगता है,कि वास्तव में उनकी लडकी को परेशान किया जा रहा है,वे आते है,और लेकर चले जाते है,लडका अगर मना भी करता है,तो बहू को लगता है,कि वह जब तक सास की बातों का जबाब नही दे देती है,तब तक इस घर में रहना ही बेकार है,और कानून के सहारे भारत की पुलिस को एक और मुर्गा मिल जाता है,वह बहू के घर वालों की झूठी तारीफ़ करती है,और लडके वाले के घर जाकर दहेज प्रताडना के केश में या तो धर लेती है,या फ़िर लडके वाले अपनी इज्जत बचाने के चक्कर में पांच दस लाख के चक्कर में आजाते है,मात्र शरीर की कमजोरी के कारण इतना सब कुछ होता है,पुराने जमाने में जब लडके की शादी की जाती थी,तो शादी के दिन से ही लडके को एक भैंस का पूरा दूध पिलाया जाता था,और बहू को भी तरह तरह के भोजन और पौष्टिक सामग्री से पूरित किया जाता था,सेक्स को दाल रोटी नही समझा जाता था,कभी कभी कभार जब मौका मिलता था,तब जाकर सेक्स किया जाता था,उस सेक्स में और आज के सेक्स में बहुत अन्तर आगया है,और इसी शरीर की कमजोरी के कारण लाखों मुकद्दमें भारतीय अदालतों में चल रहे है,या तो लडके की कमजोरी के कारण खाते पीते की घर की लडकी अपनी हवस को पूरा नही कर पायी,और पति को बेकार समझ कर अदालत का दरवाजा पकडा,या फ़िर दोनो के अन्दर ही अधिक कमजोरी के कारण सिर का दर्द चालू हुआ और रोजाना की चिढ चिढ होने लगी,और अन्त अदालत में जाकर मुकद्दमे के रूप में हुआ,भारतीय अदालतों के अन्दर पुराने जज विराजमान है,लेकिन उनको तो पुलिस और वकील जैसा बता देंगे,वैसा ही वे न्याय कर देंगे,भारत में एक कानून बनाने की नितान्त आवश्यक्ता है,कि जैसे ही किसी प्रकार का मुकद्दमा पुलिस के पास जाये,पुलिस फ़ौरन पति और पत्नी को डाक्टरी चैक अप करवाये,और दोनो के घर वालों से हर्जाना वसूल कर भरपूर पौष्टिक भोजन और दूध का इन्तजाम करवा कर दो साल तक उनको साथ रखने का इन्तजाम करे,दोनो ही खूब खा खा कर और मौज मस्ती करने के बाद जब छक जायेंगे और दो साल के अन्दर एक बच्चा हो ही जायेगा,अपने आप गृहस्थी चलने लगेगी.केवल शरीर की कमजोरी के कारण कितने जज और वकील आज मौज कर रहे है,और कितने दरोगाजी अपनी कमाई दहेज के नाम पर कर रहे है,सबकी आमदनी का चारा खत्म होगा,और भारत से यह अन्तर्द्वंद का धन्धा खत्म होगा.