भारत में चैक बाउंसिंग

भारत एक कृषि प्रधान देश है,भारत में लोगों को बैंक किसी भी काम के लिये चैक सुविधा प्रदान करती है,चैक का काम लोगों को अधिक नगद धन साथ लेकर चलने से रोकने के लिये है,साथ ही बडी रकम को लोगों को चैक के द्वारा प्रदान करने की सुविधा भी दी जाती है.किसी भी सुविधा को असुविधा में बदलने के लिये बैंकों के कानून एक जैसे नही है,बैंक किसी भी रकम के लिये अधिक चैक संख्या में प्रदान करती है,खाते में पूरी रकम नही भी होने की दशा में ग्राहक किसी को भी चैक दे देता है,और जिसे चैक दिया जाता है,वह अपने खाते के द्वारा बैंक में चैक लगाता है,नतीजा बैंक चैक बाउंस कर देती है,जिसे चैक दिया गया है,वह सीधा सम्बन्धित पुलिस स्टेशन जाता है,या किसी बकील की सहायता लेकर उस चैक की एवज में कोर्ट केश कर देता है,कोर्ट सीधा सा सम्मन पुलिस के जरिये चैक को देने वाले के पास पहुंचाता है,और जिस रकम का चैक है,उस रकम के अलावा बकील और कोर्ट आदि का खर्चा भुगतान करने का आदेश देता है,अगर किसी प्रकार से अदाकर्ता भुगतान नही कर सकता है,तो उसे जेल जाना पडता है,अथवा कोर्ट उसकी चल या अचल सम्पत्ति को कुर्क करने का आदेश देता है,इस एवज में कोर्ट सीधा कलेक्टर को आदेश देता है और कलेक्टर सम्बन्धित एसपी को आदेश देता है,एसपी सम्बन्धित थाने की सहायता से अदाकर्ता के मकान या जिस सम्पत्ति को चैक की कीमत के बराबर समझता है,कुर्क करने के बाद सम्पत्ति को हाथोंहाथ लेने वाले के नाम कर देता है.अथवा नही कुर्क होने की दशा में ताला लगाकर मकान में रहने वालों को घर से बाहर कर देता है.
कानून के द्वारा कानून को तोडने का काम भारत वर्ष के निवासियों के लिये सुविधाजनक बात मानी जाती है,चैक को देने वाला और उसकी परिसम्पत्ति का हिसाब किसी भी बैंक को रखने का अधिकार है,अगर बैंक खाता खोलते ही खाताधारक की सम्पत्ति का ब्यौरा अपने पास रखती है,अथवा खाता धारक की सम्पत्ति कितनी कीमत की है,इसका ब्यौरा बैंक के पास है,तो वह खाता धारक की पूरी जानकारी बैंक के मुख्य रिकार्ड तथा बैंक का काम करने वाली संस्था के पास होना चाहिये,और जैसे ही कोई दिये गये चैक को बैंक में लगाता है,उसकी जानकारी के अनुसार बैंक को चैक लगाने से पता चल जायेगी,अगर किसी प्रकार से चैक देने वाले के पास जिस कीमत का चैक लगाया है,राशि नही है,तो चैक देने वाले से किसी प्रकार से टेलीफ़ोन या मोबाइल से फ़ोन करके पूंछना चाहिये,अगर किसी प्रकार का संतोषजनक उत्तर नही मिलता है,तो चैक को लगाने वाले को वापस कर देना चाहिये.इस प्रकार से कानुन के द्वारा कानून तोडने वाले सभी काम खत्म हो जाते है.

चैक के द्वारा हो रहे क्राइम को अगर सही रूप से देखा जाये तो छल करने वाले लोग जो प्राइवेट रूप से बैंकिन्ग का काम कर रहे है,जरूरत पडने पर वे किसी को चैक पर भुगतान अधिक ब्याज के लोभ में कर देते है,सामने वाला अगर किसी प्रकार समर्थ होता तो वह रकम का इन्तजाम किसी अन्य प्रकार से कर लेता,उसे पहले तो यह लगता है,कि वह रकम को किसी प्रकार से वापस कर देगा,मगर भारतीय प्राकृतिक कारणों अथवा किसी प्रकार की घरेलू आफ़त के चलते,जब अदाकर्ता ली गयी रकम को अदा नही कर पाता है,तो जिसने रकम दी है,वह अदालत में जाकर अपनी रकम को लौटाने का झूठा शपथ पत्र लगाता है,अधिकतर मामलों के अन्दर खाली चैक ही रकम लेने वाले से लिये जाते है,और रकम को भरने का काम जिसने रकम दी है,उसके द्वारा अधिकतर किया जाता है,जब रकम देने वाले को रकम लेनी होती है,या परेशान करना होता है,तो वह खाली चैक पर जिसपर पहले से हस्ताक्षर करवा लिये गये होते है,अपनी लिखावट में चैक को तारीख और रकम को भर कर बैंक में लगा देता है,बैंक हस्ताक्षर को वेरीफ़ाई करती है,लेकिन जब मामला चैक अनादर का होता है,तो चैक को भरने वाले की लिखाई को भी देखना जरूरी होता है,अगर चैक को देने वाला हस्ताक्षर कर सकता है,तो चैक को भर क्यों नही सकता है,अगर निश्चित रकम को चैक देने वाले ने ही भरा है,तब चैक को अदालत में लेने और केश को दर्ज करने का अधिकार होना चाहिये,केवल इतनी सी कार्यवाही से अदालत के अस्सी प्रतिशत केश अपने आप खत्म हो जाते है,और जिन लोगों ने अदालत में अपने द्वारा रकम भरने के बाद चैक लगाये है,वे आसानी से खुद कानून के घेरे में आजाते है.और जो बेचारे बिना किसी गल्ती के ब्याजखोरों के चक्कर में फ़ंस कर अपना सब कुछ गंवा बैठे है,वे बच सकते है.

पारिवारिक न्यायालय में जाने का मतलब शारीरिक कमजोरी !

आजकल बच्चे पैदा करने के लिये कोई समझ का काम नही करता है,जभी कामुकता का उदय हुआ,और पत्नी पति के साथ,पति पत्नी के साथ अपना सम्बन्ध बना लेता है,एक दूसरे को परास्त करने के बाद जब शरीर का पिछला कमाया हुआ धन वीर्य या रज स्खलित हो जाता है,तो पत्नी का गर्भवती हो जाना लाजिमी होता है,नौ महिने और दस दिन के बाद बच्चा पैदा हो जाता है,उस बच्चे का ख्याल केवल माता के प्रति ही रहता है,पिता का काम तो लोकाचार और दया भाव के चलते अपने को और ऊंचा दिखाने के चक्कर में बच्चे का पालन पोषण करना होता है,वह जमाना चला गया जब बच्चे के प्रति संस्कार डाले जाते थे,आज तो बच्चे के अन्दर वही संस्कार डाले जा रहे है,कि वह किस प्रकार से अधिक से अधिक चालाक बन कर लोगों से अधिक धन कमाने की मशीन बने,और जब वह धन कमाने की मशीन बन जाता है,तो उससे अलग अलग कारणों को पैदा करने के बाद धन की मांग की जाती है,जब तक वह अपने भाव में नही रहता धन को माता पिता को देता रहता है,और जैसे ही उसकी पत्नी को पता चलता है,कि उसका पति अपनी कमाई का हिस्सा अपने माता पिता को दे रहा है,वह अपने त्रिया चरित्र के चलते पति को इतना मजबूर कर देती है,कि पति के सामने से अपने ही खर्चे पूरे नही हो पाते है,वह अपने माता पिता को क्या दे,माता का खिंचाव बच्चे के प्रति रहता है,वह चाहती है कि बच्चा उसी प्रकार से व्यवहार करे जिस प्रकार से वह पहले करता था,और जिस प्रकार से पहले वह माता के हाथ का ही खाना खाया करता था,और किसी भी आफ़त के आने के कारण सबसे पहले अपनी माता को ही पुकारा करता था,पत्नी के आते ही माता का स्वभाव अपने अनुसार चलाने का होता है,लेकिन पत्नी भी उससे तीस साल कम से कम छोटी होती है,इस तीस साल का जनरेशन गेप साधारण सी गति से चलने वाली जिन्दगी पर आजाती है,घर में तनाव होता है,और झगडे बढ जाते है,झगडे बढने का कारण जो मुख्य  होता है,वह समझदार ही जान पाते है,जब बच्चे की शादी हो जाती है,और बच्चा और बच्ची आज के मीडिया के अनुसार अपने को हीरो और हीरोइन समझने लगते है,तथा रात को अपनी मर्जी से सेक्स के प्रति उन्मुख होते है,तो मध्यम परिवारों में जितना खाना मिलता है,सभी को पता है,आदमी रात को एक बार ही खाना सही तरीके से खा पाता है,पूरा दिन चाय और अन्य खानों पर चलते है,भूख लगने पर बाजार का पीजा या डबल रोटी पर ही पूरा दिन निकालना पडता है,जवानी के नशे में और अधिक से अधिक मजा लेने के चक्कर में पति पत्नी यह भी भूल जाते है,कि उनके अन्दर वीर्य या रज का भन्डार तो भरा नही है,जो लगातार चलता रहेगा,रोजाना के नये नये सेक्स के तरीके और ब्लू फ़िल्मों को देख कर सेक्स का नया नया तरीका करने के बाद शरीर की ताकत खत्म हो जाती है,इधन सवेरा होते ही काम पर जाना पडता है,और माताजी भी अपने को फ़्री समझ कर घर का पूरा काम नई बहू पर डाल देती है,नई बहू के अन्दर रात की कामक्रीडा के बाद इतनी भी तथा नही रहती है,कि सवेरे की कोई कथा की जाये,वह बिस्तर से लेट उठ पाती है,शरीर की कमजोरी और थकावट से शरीर का जर्रा जर्रा दर्द कर रहा होता है,माताजी को लगता है,कि बहू काम नही करना चाहती है,घर के अन्दर चिक चिक चालू होती है,बहू झल्लाहट के मारे अपने पीहर फ़ोन करती है,और पीहर वालों को लगता है,कि वास्तव में उनकी लडकी को परेशान किया जा रहा है,वे आते है,और लेकर चले जाते है,लडका अगर मना भी करता है,तो बहू को लगता है,कि वह जब तक सास की बातों का जबाब नही दे देती है,तब तक इस घर में रहना ही बेकार है,और कानून के सहारे भारत की पुलिस को एक और मुर्गा मिल जाता है,वह बहू के घर वालों की झूठी तारीफ़ करती है,और लडके वाले के घर जाकर दहेज प्रताडना के केश में या तो धर लेती है,या फ़िर लडके वाले अपनी इज्जत बचाने के चक्कर में पांच दस लाख के चक्कर में आजाते है,मात्र शरीर की कमजोरी के कारण इतना सब कुछ होता है,पुराने जमाने में जब लडके की शादी की जाती थी,तो शादी के दिन से ही लडके को एक भैंस का पूरा दूध पिलाया जाता था,और बहू को भी तरह तरह के भोजन और पौष्टिक सामग्री से पूरित किया जाता था,सेक्स को दाल रोटी नही समझा जाता था,कभी कभी कभार जब मौका मिलता था,तब जाकर सेक्स किया जाता था,उस सेक्स में और आज के सेक्स में बहुत अन्तर आगया है,और इसी शरीर की कमजोरी के कारण लाखों मुकद्दमें भारतीय अदालतों में चल रहे है,या तो लडके की कमजोरी के कारण खाते पीते की घर की लडकी अपनी हवस को पूरा नही कर पायी,और पति को बेकार समझ कर अदालत का दरवाजा पकडा,या फ़िर दोनो के अन्दर ही अधिक कमजोरी के कारण सिर का दर्द चालू हुआ और रोजाना की चिढ चिढ होने लगी,और अन्त अदालत में जाकर मुकद्दमे के रूप में हुआ,भारतीय अदालतों के अन्दर पुराने जज विराजमान है,लेकिन उनको तो पुलिस और वकील जैसा बता देंगे,वैसा ही वे न्याय कर देंगे,भारत में एक कानून बनाने की नितान्त आवश्यक्ता है,कि जैसे ही किसी प्रकार का मुकद्दमा पुलिस के पास जाये,पुलिस फ़ौरन पति और पत्नी को डाक्टरी चैक अप करवाये,और दोनो के घर वालों से हर्जाना वसूल कर भरपूर पौष्टिक भोजन और दूध का इन्तजाम करवा कर दो साल तक उनको साथ रखने का इन्तजाम करे,दोनो ही खूब खा खा कर और मौज मस्ती करने के बाद जब छक जायेंगे और दो साल के अन्दर एक बच्चा हो ही जायेगा,अपने आप गृहस्थी चलने लगेगी.केवल शरीर की कमजोरी के कारण कितने जज और वकील आज मौज कर रहे है,और कितने दरोगाजी अपनी कमाई दहेज के नाम पर कर रहे है,सबकी आमदनी का चारा खत्म होगा,और भारत से यह अन्तर्द्वंद का धन्धा खत्म होगा.

Birth Data

Wufoo : Birth Data

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astrobhadauria

When Sun arise,everything visible in this world,When we live in dark,that time more and more doubt in our unconsciouses mind,and when we find the way of life,that we start progress in each steps,every one start to say like a generations of a wise person.Every degree of astrology describe some thing,if we can understand the rules and laws of Astrology then we can find the way in the dark of physical path by the light of astrology.

Ramendra Singh Bhadauria (Astrobhadauria) Always busy to find the accuracy in the astrology writing,there are some thing new by him about rectifications of the stars combined strength.Like When Saturn with Moon,Mars,and Mercury,then person always making try for the business.After clarification’s of the birth chart the light of the fine way start to blink in mind and person start to make works,and start to remove faults from the careers.

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